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Thursday, November 12, 2009

अच्छी दुनिया ..

आप सब के मन में भी यह प्रश्न उठता होगा की आज कल दुनिया ख़राब होगई , इस दुनिया को ठीक रस्ते पर कैसे लाया जाए ?यह कहना की दुनिया आज कल ख़राब होगई ,इस बुनियादी भ्रम पर खड़ा हुआ है की पहले दुनिया अच्छी थी |यह बात इतनी बुनियादी रूप से ग़लत है की जिसका कोई हिसाब नही ,पहले की दुनिया भी आज से अच्छी नही थी ,आज का आदमी ख़राब हो गया है ,इस से ऐसा ख्याल पैदा होता है कि पहले का आदमी अच्छा था |शायद हमे पता नही कि इस तरह के ख्याल पैदा होजाने का कारण क्या है ? जमीन पर जो पुरानी से पुरानी किताबे उपलब्ध है , सबसे पुरानी किताब चीन में उपलब्ध है , जो कोई : हजार वर्ष पुरानी है | उस पुरानी किताब में भी यह लिखा हुआ है कि आज कीदुनिया ख़राब हो गई , पहले के लोग अच्छे थे | यह पहले के लोग कब थे , आज तक एक भी ऐसी किताब नही मिलीं जिसने यह कहा हो की अभी के लोग अच्छे है | जो लोग मौजूद है , ये अच्छे है अब तक मनुष्य जाती के पास ऐसा एक भी उल्लेख नहीजो यह कहता हो , अभी के लोग अच्छे है | पहले के लोग अच्छे थे ये पहले के लोग कब थे ? अगर अच्छे लोग जमीन पर थे तो अच्छे लोगो से ये बुरे लोग कैसे पैदा होगये | अच्छी संस्क्रति से बुरी संस्क्रति पैदा कैसे होगई , उस अच्छे से विकार कैसे पैदा होगया ? नही सच्चाई कुछ और है , सच्चाई बिल्कुल उलटी, अगर पहले के लोग अच्छे थे तो ये युद्ध कौन करता था , हिंसा कौन करता था |पुराने से पुराने युद्ध की कथा हमारे महाभारत की है , वे लोग अच्छे लोग थे ? अपनी पत्नियों को दावपर लगाने वाले लोग अच्छे थे | आज एक साधारण आदमी भी अपनी पत्नी को दाव पर लगाने में दो बार बिचार करेगा , सोचेगा यह उचित है | लेकिन उस समय जिसको हम कहे कि जो धर्म का बहुत बिचारशील आदमी था वह भी विचार नही कर रहा है पत्नी को दाव पर लगते वक्त |
जुआ खेलने में कोई संकोच नही होरहा उसे , अपने ही भाई कि पत्नी को नंगा करने में किसी को कोई संकोच नही हो रहा है , बीच सभा में और वंहा जो लोग बैठे है वे बडे विचारशील है धर्म के ज्ञाता है , वे भी बैठे देख रहे है |ये लोग अच्छे थे तो महाभारत क्यो होगया |इतना संघर्ष , इतना रक्तपात क्यो होगया , अच्छे लोग तो थे| अच्छे लोग एक मिथ्या , एक कल्पना , और कहानी है , नही तो बुद्ध ने किन लोगो को समझाया , महावीर ने किसको समझाया कि हिंसा मत करो , अगर लोग अहिंसक थे तो महावीर ढाई हजार साल पहले किसको समझा रहे थे कि चोरी मत करो , महावीर ने किसको समझाया कि हिंसा मत करो दूसरे कि स्त्री पर बुरी नजर मत रखो , लोग रखते होंगे तभी तो समझा रहे होंगे नही तो समझायेंगे कैसे अगर सारे लोग ब्रह्मचर्य को मानते थे तो ब्रम्हचर्य का उपदेस किसके लिए था , और अगर सारे लोग ईमानदार थे तो , ईमानदारी कि शिक्षाये हमारे ग्रंथो में लिखी हुई है , किसके लिए लिखी है |लोग बेईमान रहे होंगे , तब तो ईमानदारी कि बात लिखी है ग्रंथों में , नही तो कौन लिखता , जरुरत रही होगी जिन्दगी को कि ईमानदारी को सिखाये , लोग बेईमान रहे होंगे हत्यारे रहे होंगे , लोग चोर रहे होंगे तब तो ब्रह्मचर्य समझाया जा रहा है , अंहिंसा समझाई जारही है , और लोग एक - दूसरे से घ्रणा करते होंगे तब तो प्रेम के इतने उपदेश दिएगये , नही तो किसको दिए जाते |लेकिन भ्रम कुछ और बातो से पैदा होजाता है |हर युग में अच्छे लोग होते है उन अच्छे लोगो कि कथा बची रहती है , बाकि लोगो के जीवन का कोई हिसाब नही बचता |हमारे युग में गाँधी थे , दो हजार साल बाद हमलोग बैठे है , हमारी कोई कथा बची रहेगी , लेकिन गाँधी कि बची रहेगी |
और दो हजार साल बाद लोग गाँधी को कहेंगे कितना अच्छा आदमी था , उस युग के लोग कितने अच्छे रहे होंगे , गाँधी से वे सारे युग को तौल लेंगे ,जो बिल्कुल झूठी तौल होगी |
गाँधी अपवाद था नियम नही था और जब दो हजार साल बाद हमारी कोई कथा नही रह जायेगी और गाँधी कि कथा शेष होगी , तो गाँधी के आधार पर हम सबके बाबत जो निर्णय लिया जाएगा बिल्कुल झूठा होगा |हम तो गाँधी के हत्यारे है , लेकिन दो हजार साल बाद लोग कहेंगे कि गाँधी कितना अच्छा आदमी था , उस समाज के लोग कितने अच्छे रहे होंगे |तो हम राम , कृष्ण , बुद्ध और महावीर दो चार नामो के आधारों पर हम उस जमाने के लोगो के बारे में सोचते है जो सोचना बिल्कुल ग़लत है , बिल्कुल झूठ है |ये आदमी अपवाद थे नियम नही थे , जंहा तक सामान्य आदमी का सम्बन्ध है , आदमी विकसित हुआ है , उसका पतन नही हुआ है |