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Monday, January 4, 2010

जो बीत गई सो बात गई

जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
वह डूब गया तो डूब गया
अंबर के आँगन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
जो छूट गये फिर कंहा मिले
पर बोलो टूटे तारो पर
कब अंबर शोक मनाता है
जो बीत गई सो बात गई

जीवन में वह था एक कुसुम
थे उस पर नित्य निछावर तुम
वह सूख गया तो सूख गया
मधुबन की छाती को देखो
सूखी इसकी कितनी कलियां
मुरझाई कितनी वल्लरियाँ
जो मुरझाईं फिर कन्हा खिली
पर बोलो सूखे फूलो पर
कब मधुबन शोर मचाता है
जो बीत गई सो बात गई
जीवन में मधु का प्याला था
तुमने तन मन दे डाला था
वह टूट गया तो टूट गया
मदिरालय का आँगन देखो
कितने प्याले हिल जाते है
गिर मिटटी में मिल जाते है
जो गिरते है कब उठते है
पर बोलो टूटे प्यालो पर
कब मदिरालय पछताता है
जो बीत गई सो बीत गई
मृदु मिटटी के बने हुए है
मधु घाट फूटा ही करते है
लघु जीवन लेकर आये है
प्याले टूटा ही करते है
फिर भी मदिरालय के अन्दर
मधु के घाट है मधु के प्याले है
जो मादकता के मारे है
वे मधु लूटा ही करते है
वह कच्चा पीने वाला है
जिसकी ममता घट प्यालो पर
जो सच्चे मधु से जला हुआ
कब रोता है चिल्लाता है
जो बीत गई सो बात गयी !!



— हरिवंशराय बच्चन